Wednesday, May 7, 2014

अलविदा!



वह आयी...
उसे जाना पड़ा था
किसी के बारे में खुद को,
समझाना पड़ा था...

उसने देखा कमरे में,
चादर ओढ़े वह सो रहा था
उन दोनों के कमरे में
वह अकेला सो रहा था...

चप्पलें पहन के ही वह
कमरे के अंदर आयी,
पसंद नहीं थी जो बात उसको,
आज ध्यान में ही ना आयी!

मेज़ पे पड़ी चित्रों की किताब,
हाथ में उसने उठायी..
रंगीन पैन्सिल मिली उसे
उससे ही वह लिख आयी-

"मुझे पता है,
तुम सब जानते हो!
मेरी ज़रूरतों को
सही पहचानते हो...

ज़िन्दगी कभी भी रूकती नहीं,
और तुम भी कभी ना रुकना,
कभी होठों पे जो चूमा था तुमको
उसे ही मेरा आखिरी समझना!"

*************************************************

वह आया...
उसी मेज़ पर बैठा
दो चाय ऑर्डर कर के,
सोचता वहीँ पर बैठा...

उसने सोचा, प्यार मिला
एक सुंदर स्त्री का साथ मिला...
कितना रहता था अकेले मैं,
पकड़ने के लिए एक हाथ मिला.

मेज़ पे उसने बैग रखी,
आज वक़्त पे वह आयी थी,
तोहफे माँगनेवाली आज खुद
एक तोहफा बन कर आयी थी...

"बता दिया?"
"हाँ, चिट्ठी छोड़ आयी हूँ.."
"कब तक रहोगी?"
"मैं...घर छोड़ आयी हूँ..!"

"मैं सोच रहा था... सब की कितनी
आशाएँ हम से होती हैं,
और साथ निभाने की,
वजहें कितनी होती हैं..."

चूम कर उसने वह गोरा-सा हाथ,
कहा, "शुक्रिया, हसीन साथ के लिए...
पर इसे मेरा अलविदा समझना,
उसी, चिठ्ठी वाली बात के लिए!"



#WednesdayWordplay is a poem-series in which readers send me a topic, a line, a picture or simply anything, which I complete/ interpret my way and present my interpretations through poetry! The idea is to present a perspective that is different from the reader's through interactive poetry.



This week's #WednesdayWordplay idea- the topic: "The last kiss... before they parted forever" was contributed by someone I really look up to- my sister, the eldest and the wisest in my twitter-gifted girl-gang, a physician practising in Mumbai, Dr. Priyanka (tweets awesome stuff as @SatanKiNani). Pri, I hope I have done justice to the topic you sent, and presented it in a way different from what you thought? Send in your ideas to me, the next poem could be based on what you send! :-)